बिहार के प्रमुख मेले और त्योहार | Bihar ke Pramukh Mela aur Tyohar

Tagline: बिहार – परंपरा और आस्था का संगम

परिचय:
बिहार ना केवल इतिहास और राजनीति का केंद्र रहा है, बल्कि यह सांस्कृतिक विविधता, आस्था और त्योहारों की जीवंत परंपरा के लिए भी प्रसिद्ध है। यहाँ के मेले और त्योहार केवल धार्मिक अवसर नहीं, बल्कि सामाजिक मेलजोल, व्यापार और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति के भी माध्यम हैं। इस लेख में हम जानेंगे बिहार के प्रमुख मेले और त्योहारों के बारे में जो राज्य की पहचान हैं।


बिहार के प्रमुख त्योहार | Famous Festivals of Bihar

1. छठ पूजा

बिहार की आत्मा में रची-बसी यह पूजा सूर्य देवता और छठी मइया को समर्पित होती है। यह कार्तिक और चैत्र मास में मनाई जाती है। महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं और सूर्यास्त एवं सूर्योदय पर अर्घ्य देती हैं। गंगा, पोखर या नदी किनारे का दृश्य अत्यंत मनमोहक होता है।

2. मकर संक्रांति (तिलkut और खिचड़ी पर्व)

14 जनवरी को मनाया जाने वाला यह पर्व नए मौसम की शुरुआत का प्रतीक है। इस दिन तिल और गुड़ के लड्डू, तिलकुट और खिचड़ी खाने की परंपरा है।

3. दुर्गा पूजा

पटना, गया, भागलपुर, मुजफ्फरपुर जैसे शहरों में भव्य पंडाल, रंग-बिरंगी लाइटिंग और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ दशहरा पर्व धूमधाम से मनाया जाता है।

4. होली

रंगों का त्योहार बिहार में बड़े उत्साह से मनाया जाता है। खासकर मिथिलांचल और भोजपुर क्षेत्रों की पारंपरिक होली गीत और नृत्य खास पहचान रखते हैं।

5. सरस्वती पूजा

विद्या की देवी सरस्वती की पूजा खासकर स्कूल-कॉलेजों में बड़े ही उत्साह के साथ होती है। यह बिहार के युवाओं में संस्कृति के साथ जुड़ाव का प्रतीक है।

6. ईद और बकरीद

बिहार की गंगा-जमुनी तहज़ीब में मुस्लिम समुदाय के त्योहारों का भी खास महत्व है। पटना, दरभंगा, और मुंगेर में ईदगाहों पर नमाज़ और आपसी भाईचारे की तस्वीरें देखने को मिलती हैं।

7. दीपावली

घर-घर में दीयों से रोशनी होती है, मां लक्ष्मी की पूजा होती है और पटाखों से आकाश जगमगाता है। व्यवसायियों के लिए ये नया साल भी होता है।


बिहार के प्रमुख मेले | Famous Fairs of Bihar

1. सोनपुर मेला

यह मेला एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला माना जाता है, जो छठ पूजा के बाद सोनपुर में आयोजित होता है। यहाँ हाथी, घोड़े, बैल, पक्षी आदि की खरीद-बिक्री होती है। अब यह मेला सांस्कृतिक और हस्तशिल्प मेले में भी बदल गया है।

2. श्रावणी मेला

सावन महीने में हजारों कांवड़िए सुल्तानगंज से जल लेकर झारखंड स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम (देवघर) जाते हैं। यह यात्रा लगभग 105 किलोमीटर की होती है और इस दौरान “बोल बम” के जयकारे से वातावरण गूंज उठता है।

3. राजगीर मेला

यह मेला मगध की ऐतिहासिक राजधानी राजगीर में कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर लगता है। बौद्ध धर्म, जैन धर्म और हिन्दू धर्म के अनुयायी यहां बड़ी संख्या में एकत्र होते हैं।

4. मल्लपुर मेला (गया)

यह मेला गया में आयोजित होता है और मुख्यतः धार्मिक व सांस्कृतिक आयोजनों के लिए प्रसिद्ध है।

5. पटना पुस्तक मेला

पढ़ाई के प्रति उत्साह बढ़ाने वाला यह मेला हर साल आयोजित होता है और विद्यार्थियों, शिक्षकों और साहित्य प्रेमियों के लिए एक बड़ा आकर्षण होता है।


त्योहारों और मेलों का सामाजिक और सांस्कृतिक महत्त्व

  • ये आयोजन सामाजिक समरसता को बढ़ाते हैं।
  • स्थानीय कारीगरों, कलाकारों और व्यापारियों को आर्थिक अवसर मिलता है।
  • राज्य में पर्यटन को बढ़ावा मिलता है जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बल मिलता है।
  • नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने में मदद मिलती है।

बिहार पर्यटन और संस्कृति को बढ़ावा देने वाली पहलें

राज्य सरकार द्वारा इन मेलों और त्योहारों के दौरान विशेष ट्रेन, सुरक्षा, पर्यटन केंद्र और सांस्कृतिक मंचों का आयोजन किया जाता है। “Incredible India” और “Dekho Apna Desh” जैसे अभियानों के तहत बिहार को प्रमुख पर्यटन स्थल के रूप में प्रस्तुत किया गया है।


निष्कर्ष | Conclusion

बिहार के मेले और त्योहार केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज, संस्कृति और आस्था के त्रिवेणी संगम हैं। ये आयोजन राज्य को जीवंत बनाते हैं और भारत की विविधता में एकता की मिसाल पेश करते हैं। अगर आप कभी बिहार जाएं, तो इन त्योहारों और मेलों का हिस्सा जरूर बनें – क्योंकि यहीं से असली भारत की झलक मिलती है।

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